PM जन औषधि केंद्र : सरकार के साथ मिलकर सिर्फ 2.5 लाख रूपए में शुरू करें अपना बिजनेस

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना क्या है व केंद्र खोलने की आवेदन प्रक्रिया  2020 PM Bhartiya Jan Aushadhi Pariyojana in hindi (PMBJP)

देश में बढती हुई मंहगाई से हर कोई वाकिफ है. आज के समय में कोई भी काम हो यदि आपके जेब में पैसे नहीं हैं, तो वह काम नहीं हो सकता. फिर चाहें वह ईलाज करवाना ही क्यों न हो. किसी छोटी सी बीमारी या बड़ी बीमारी के लिए ईलाज करवाना हो, तो लोगों को बढ़ते दवाइयों के दामों से जूझना पड़ता है. किन्तु सरकार लोगों की इस परेशानी को समझती हैं, इसलिए एक योजना भी लेकर आई हैं, इस योजना का नाम है ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना’. इसके तहत लोगों को कुछ जेनेरिक औषधियां किफायती दामों में उपलब्ध होती हैं, जिनके दाम काफी अधिक है. हालही में आंवला एवं त्रिफला जैसी कुछ अन्य औषधियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है. अब इस योजना के तहत लाभार्थियों को कौन सी औषधियां खरीदने पर सस्ते दाम का लाभ मिलेगा इसकी जानकारी आप यहाँ देख सकते हैं.

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योजना का नामप्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना
लांच की गईप्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा
लाभार्थीदेश के गरीब एवं माध्यम वर्ग के लोग
लाभसस्ते दाम में औषधियां उपलब्ध कराना
संबंधित विभागब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया (बीपीपीआई)

 जेनेरिक दवाई क्या हैं 

जेनेरिक दवाई ब्रांड वाली दवाइयां ही होती हैं. किन्तु इसके दामों में काफी फर्क होता है. ब्रांड वाली दवाइयां जेनेरिक दवाइयों की तुलना में काफी मंहगी होती हैं. हालाँकि दोनों से ईलाज एक सा होता है. किन्तु लोगों को ऐसा लगता हैं कि जेनेरिक दवाइयां सस्ती होने की वजह से काम की नहीं रहती हैं लेकिन वे ये नही जानते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं है. जेनेरिक दवाइयां एवं ब्रांडेड दवाइयां दोनों में से आप किसी का भी उपयोग करें आपको रिजल्ट एक सा ही मिलेगा.

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ब्रांडेड मेडिसिन की तुलना में इसका दाम कम क्यों होता है 

अब हम आपको बताते हैं कि जेनेरिक दवाइयों का दाम कम क्यों होता हैं, इसका मुख्य कारण यह हैं कि ये दवाइयां बनाने वाली कंपनियां अपनी दवाइयों के प्रोमोशन एवं उसकी मार्केटिंग पर विशेष ध्यान एवं खर्च नहीं करती है. इसकी तुलना में ब्रांडेड कंपनी का इन पर विशेष ध्यान होता है. जेनेरिक दवाइयों की एक खास बात यह भी हैं इनके दाम सरकार द्वारा निर्धारित किये जाते हैं इसलिए जेनेरिक दवाई बनाने वाली कंपनियां इसका दाम बढ़ा भी नहीं सकती हैं.  

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना की विशेषताएं 

  • योजना का उद्देश्य :- प्रधानमंत्री जी की जन औषधि परियोजना को शुरू करने का मुख्य रूप से उद्देश्य है मंहगाई की समस्या को कम करना एवं लोगों को जेनेरिक दवाइयां के प्रति जागरूक करना कि ये दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों से अलग नहीं हैं और न ही इसकी गुणवत्ता पर कोई कमी की जाती है. ये दोनों एक सी ही दवाइयां हैं और यह बाजार में आसानी से उपलब्ध भी है.
  • लाभ :- इस योजना में ऐसी जेनेरिक दवाइयां जिनके दाम काफी अधिक हैं. और इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही हैं. तो उन्हें ये दवाइयां कम दामों में उपलब्ध कराई जा रही हैं.
  • लाभार्थी :- इस योजना का लाभ लेने वाले व्यक्ति न सिर्फ गरीब लोग हैं बल्कि इसका लाभ मध्यम वर्ग के लोगों को भी मिल रहा है.
  • जन औषधि केंद्र :- इस योजना के तहत सस्ते दामों में मिलने वाली औषधियां लाभार्थी ‘जन औषधि केंद्र’ में जाकर प्राप्त कर सकते हैं. देश में कई जगहों पर जन औषधि केंद्र शुरू किये गये हैं, जहाँ ये दवाइयां आम लोगों को सस्ते दामों में बेचीं जाती है.
  • लाभार्थियों को फायदा :- डॉक्टर्स को ब्रांडेड दवाइयां बनाने वाली कंपनी की ओर से कुछ कमीशन मिलता हैं इस वजह से वे अपने पास आने वाले मरीजों को ब्रांडेड कंपनी की दवाइयां खाने के लिए कहते हैं. किन्तु यदि आप जेनेरिक दवाइयां लेंगे, तो इससे आपको ब्रांडेड दवाइयों के मुकाबलें 60 से 70 प्रतिशत का मुनाफा होगा.
  • बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी पैड की सुविधा :– जन औषधि केंद्र में बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी पैड सुविधा भी शुरू की जा रही हैं. जहाँ ये 2.5 रूपये प्रति पैड की कीमत में मिलेंगे.

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जन औषधि केंद्र में उपलब्ध होने वाली दवाइयां (Jan Aushadhi Kendra Available Drugs)

इस योजना को यूपीए सरकार द्वारा लांच किया गया था उस समय इसके तहत लोगों को सिर्फ जेनेरिक एलोपैथिक दवाइयां सस्ते दामों में मिलती थी. किन्तु एनडीए सरकार ने इसमें कुछ संशोधन किया और अब इसमें 20 आयुर्वेदिक उत्पादों को शामिल कर लिया गया हैं. डीओपी, बीपीपीआई और आयुष मंत्रालय द्वारा लोगों को अपना इम्यून सिस्टम तेज करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाइयां एवं उत्पादों का सेवन करने की सलाह दी गई थी उन्हीं में से कुछ दवाइयों एवं उत्पादों के नाम इस प्रकार हैं –

  • आंवला
  • त्रिफला
  • अश्वगंधा
  • च्यवनप्राश
  • आयुर्वेदिक फर्मेंटेड फार्मुलेशन्स (किण्वित, असावा एवं अरिष्टा)
  • तरल फार्मुलेशन (अवालेह)
  • गोंद आधारित उत्पाद (गुग्गुलु)
  • पाउडर वाली दवाइयां (चूर्ण)
  • तेल आधारित उत्पाद (तैला)
  • टेबलेट आधारित उत्पाद (गुटिका) आदि.

इसके आलवा इस कुछ जेनेरिक दवाइयां एवं उसकी कीमत की जानकारी इस प्रकार है –

जेनेरिक दवाईएमआरपी
Aceclofenac + Paracetamol (100 mg and 500 mg) Tab10.00
Aceclofenac 100 mg Tab8.00
Aceclofenac Gel30 gm
Acetaminophen + Tramadol Hydrochloride (325 mg + 37.5 mg) TabPUR*
Asprin 150 mg TabPUR*

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प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का संचालन एवं उसका कार्य 

जन औषिधि योजना का संचालन ब्यूरो ऑफ़ फार्मा पीएसयू ऑफ़ इंडिया (बीपीपीई) के द्वारा किया जा रहा हैं यह एक नया विभाग हैं जिसे फार्मस्युटिकल्स विभाग द्वारा बनाया गया है. इसकी स्थापना यूपीए सरकार के समय सन 2008 में की गई थी. यह विभाग फार्मस्युटिकल्स विभाग के अंतर्गत ही कार्य करता है. इनके द्वारा संचालित किये जाने वाले कार्य इस प्रकार हैं –

  • जेनेरिक दवाई की जानकारी :- जेनेरिक दवाई के बारे काफी सारे लोगों को अलग अवधारणा होती है जैसे किसी का कहना है कि ब्रांडेड के तुलना में इसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है तो कुछ कहते हैं यह प्रभावशाली नहीं होती है. उनकी इन गलत अवधारणाओं की ख़त्म करने और लोगों को प्रेरित करने का काम इनका होता है.
  • जन औषधि केंद्र खोलना :- देश के सभी लोगों को ईलाज के लिए दवाइयां सस्ते दामों में मिल सके, इसके लिए सरकार ने इस योजना के तहत देश के अधिकांश भाग में जन औषधि केंद्र खुलवाने का कार्य भी इसी विभाग को दिया है.
  • जन औषधि केन्द्रों का प्रचार :- बीपीपीआई विभाग द्वारा जन औषधि केन्द्रों के प्रचार का कार्य भी किया जाता हैं. ताकि लोगों को जेनेरिक दवाइयों के बारे में सही – सही जानकारी पहुंचा सके.
  • उचित उम्मीदवार का चयन :- जन औषधि केंद्र अपने क्षेत्र में खोलने के लिए लोगों द्वारा आवेदन भी बीपीपीआई के माध्यम से लिए जायेंगे और उन्हीं का यह कार्य होगा कि वे उसी उम्मीदवार को जन औषधि केंद्र खोलने की स्वीकृति देंगे जोकि इसके योग्य है.
  • केन्द्रों का उचित संचालन :- बीपीपीआई की इस बात पर भी निगरानी रखेंगे कि जिन – जिन जगहों पर जन औषधि केंद्र खोले गये हैं वहां कार्य उचित तरीके से हो रहा है या नहीं.

जन औषधि केंद्र के लिए आवेदन करने की पात्रता मापदंड (Jan Aushadhi Kendra Eligibility Criteria)

  • जन औषधि केंद्र खोलने के लिए योग्यता मुख्य पात्रता हैं. यदि आपने बी फार्मा एवं डी फार्मा किया हुआ हैं, तो आप इसके पात्र हैं.
  • इसके अलावा कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट एवं एनजीओ भी यदि ये औषधि केंद्र खोलना चाहते हैं तो इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. लेकिन इसका संचालन करने वाला व्यक्ति बी फा.र्मा एवं डी फार्मा होना आवश्यक है
  • जन औषधि केंद्र खोलने के लिए एक प्रॉपर स्थान होना आवश्यक है जोकि 120 स्कवायेर फीट का होना चाहिए. ये स्थान अस्पतालों के कैंपस के बाहर या कोई भी उचित स्थान हो सकता हैं जहाँ ये केंद्र खोलने की अनुमति दी जाती हैं. आप यह जगह किराये से भी ले सकते हैं. इन केन्द्रों को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या फिर सरकारी दफ्तर के बार खोलने ज्यफा फायदेमंद होता है. बीपीपीआई लोअगों को जन औषधि केंद्र खोलने के लिए स्थान दिलवाने में भी मदद करती हैं.
  • आवेदक कोई टैक्स देने वाला व्यक्ति नहीं होना चाहिये पिछले 3 साल की वित्तीय जानकारी सही होनी चाहिये. इन सब का परीक्षण बीपीपीआई द्वारा किया जायेगा.

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जन औषधि केंद्र खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)

जन औषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदन के दौरान कुछ दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ेगी जोकि इस प्रकार हैं –

  • फार्मिस्ट का सर्टिफिकेट
  • जन औषधि रजिस्ट्रेशन प्रमाण पात्र
  • रिटेल ड्रग लाइसेंस एवं टिन नंबर
  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • एनजीओ या अस्पताल या चैरिटेबल ट्रस्ट आदि इसके लिए आवेदन करते हैं तो उन्हें अपने संस्थान का प्रमाण पत्र भी दिखाना होगा.

जन औषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदन कैसे करें (How to Apply for Jan Aushadhi Kendra)

जन औषधि केंद्र खोलने के लिए पहले सरकार आवेदनकर्ताओं से कुछ शुल्क लिया करती थी. किन्तु अब मोदी सरकार के आने के बाद इसमें संशोधन किया गया और अब उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होता है. इसके साथ ही आपको बता दें कि यदि कोई शुल्क लेता है तो इसकी कंप्लेंट आपको बीपीपीओई विभाग से करनी होगी. जोकि इसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करेंगे. आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया भी एकदम सरल है ताकि लोगों को अपना आवेदन करने में किसी परेशानी से न जूझना पड़े.

  • जन औषधि केंद्र के लिए आवेदन करने के लिए आप बीपीपीआई की इस अधिकारिक लिंक पर विजिट करके जन औषधि केंद्र के लिए आवेदन कर सकते हैं.
  • यहाँ पहुँचने के बाद आप जिस भी संस्थान से जुड़े हैं उसमें आपको ‘अप्लाई ऑनलाइन’ एवं ‘अप्लाई ऑफलाइन’ का विकल्प दिखाई देगा.
  • आप अपनी सुविधानुसार विकल्प का चयन कर जन औषधि केंद्र खोलने के लिए अपना आवेदन फॉर्म भर कर सबमिट कर सकते हैं.
  • इसके साथ ही आप इसी वेबसाइट से इसके दिशा निर्देशों की भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

देश में कुल जन औषधि केंद्र खोले जाने की संख्या (Jan Aushadhi Kendra in India)

देश भर में अब तब 850 जन औषधि केंद्र प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत ओपन हुए हैं. और यह आंकड़ा जल्द से जल्द से बढ़ने भी वाला है. यदि आप अपने नजदीक के जन औषधि केंद्र की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इसके लिए आप इस लिंक का सहारा ले सकते हैं. यहाँ से आपको सभी जानकारी मिल जाएगी.

जन औषधि केंद्र खोलने पर मुनाफा (Jan Aushadhi Kendra Profit)

यदि एक व्यवसाय के रूप में देखा जाये तो जन औषधि केंद्र खोलने के लिए पहले एक साल सरकार द्वारा वेतन दिया जायेगा. इसके साथ ही सालभर में जो भी कमाई होगी उसका 10 % का अनुदान भी सरकार की ओर से आवेदक को दिया जायेगा. यह अनुदान का प्रतिशत कुछ जगहों के लिए अलग भी हैं जैसे यदि किसी नक्सली प्रभावुत स्थान पर ये केंद्र खोले गये हैं तो वहां उन्हें 15 % का अनुदान दिया जायेगा.

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जन औषधि दुकान खोलने के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली मदद 

जन औषधि दुकान खोलने के लिए सरकार दुकान के मालिक को 2 लाख रुपये प्रदान किये जायेंगे और इसके साथ ही कंप्यूटर एवं हार्डवेयर से संबंधित कुछ चीजों के लगाने के लिए 50 हजार रूपये भी प्रदान किये जायेंगे. इसके अलावा इस योजना के तहत दूकान के मालिक सरकार से जेनेरिक दवाइयां 16 % कम दाम में खरीदेंगे. इसके साथ ही जो बिक्री होगी उसके अनुसार अनुदान भी सरकार देगी. इससे सरकार को भी फायदा होगा और दुकान के मालिक को भी.    

इस तरह से प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के माध्यम से लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध होने से उन्हें काफी फायदा मिल रहा है. और साथ ही जो इन केन्द्रों को खोलने के लिए आवेदन दें रहे हैं उन्हें भी पैसा कमाने का बहुत अच्छा अवसर प्राप्त हो रहा है. कुछ लोगों को तो यह रोजगार का बहुत अच्छा जरिया भी मिला है.   

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