Presumptive Taxation Scheme In Hindi

प्रकल्पित कराधान योजना  (Presumptive taxation scheme In Hindi]

इनकम टैक्स मे रिटर्न भरने के लिये सरकार ने कई प्रावधान किये है उनमे से कुछ बहुत आसान तरीके है जिसमे खातेबही या अकाउंट्स मेंटेन करने की जरुरत नही होती है उसे सरकार की प्रिज्मटीव टैक्सेशन स्कीम कहा जाता है. जिस तरह इनकम का क्षेत्र बहुत विस्तृत है ठीक उसी प्रकार टैक्सपेयर्स भी कई होते है जोंकि, हर क्षेत्र मे अपना काम करते है उनमे बिजनेसमैन,प्रोफेशनलस्, तथा अन्य कई लोग शामिल है. यह सभी इस स्कीम का फायदा ले सकते है लेकिन, हर एक को इनकम टैक्स मे एक अलग सेक्शन मे रखा गया है. जिसके अंतर्गत वह बिना किसी टेंशन के अपने रिटर्न आसानी से भर सकता है.

Presumptive Taxation Scheme

प्रिज्मटीव टैक्सेशन स्कीम क्या होती है? (What is Presumptive taxation scheme ?)

प्रिज्मटीव टैक्सेशन स्कीम सामान्य शब्दों मे समझे तो, प्रिज्युम जिसका अर्थ मानना होता है. और टैक्सेशन के तात्पर्य इनकम पर चुकाये जाने वाला टैक्स. इसका मतलब यह होता है व्यक्ति अपनी  इनकम के अनुसार स्वयं यह मान लेता है कि लगभग इतना टैक्स बनेगा तथा वह अपने इनकम टैक्स रिटर्न मे वह टैक्स सरकार को चुकायेगा. जिसमे बुक्स ऑफ अकाउंट्स मेंटेन नही करना पड़ता ना ही ऑडिट कराने की जरुरत है. यह स्कीम खासतौर पर छोटे बिजनेस या छोटे टैक्सपेयर के लिये होती है.

प्रिज्मटीव टैक्सेशन स्कीम के प्रावधान/नियम (Roles of Presumptive taxation scheme)

इनकम टैक्स अपने आप मे बहुत विस्तृत है जिसे हर कोई समझ नही पता. सरकार ने इनकम टैक्स मे ऐसे कई प्रावधान बनाये है जिससे व्यक्ति अपनी इनकम बता कर लाभ भी ले सकता है. प्रिज्मटीव टैक्सेशन स्कीम एक तरीका है जिसमे हर व्यक्ति के लिये अलग-अलग प्रावधान या नियम है इसके सेक्शन 44AD,44ADA, 44AE,

44AB के अंतर्गत भरा जाता है.

जिसे हम निम्न तरीके से समझेंगे-

सेक्शन 44AD के अंतर्गत योग्यता (Eligibility of Section 44AD)

  • निवासी एकल करदाता (रेसिडेंट इंडिविजुअल टैक्सपेयर)
  • साझेदारी फर्म (पार्टनरशीप फर्म)
  • हिन्दू अविभाजित परिवार (हिन्दू अनडिवाइडेंट फेमिली,(एचयूएफ))

यह सभी इस स्कीम का लाभ ले सकते है.

सेक्शन 44AD की नियम तथा शर्ते (Terms and Conditions of Section 44AD) –

  • इस रिटर्न की लिमिट 2 करोड़ तक की है अर्थात व्यक्ति या फर्म की ग्रोस रिसिप्ट या वार्षिक टर्नओवर 2 करोड़ से ज्यादा का नही होता चाहिये.

उदाहरण के लिये – प्रियंका ट्रेडर्स एक जनरल स्टोर है जिसका वित्तीय वर्ष 2017-18  मे टोटल टर्नओवर एक करोड़ दस लाख रूपये है (जोकि, वार्षिक टर्नओवर 2 करोड़ से कम है) यहाँ व्यक्ति ने मान लिया है कि उसे एक करोड़ दस लाख रूपये पर टैक्स भरना है तो यह रिटर्न 44AD मे भरा जायेगा जिससे वह व्यक्ति बुक्स ऑफ अकाउंट्स मेंटेन करने से बच जायेगा.

  • यदि किसी व्यक्ति ने पिछले साल के रिटर्न 44AD के अंतर्गत भरे है तो वह आने वाले पांच सालों तक यह रिटर्न 44AD के अंतर्गत ही भरेगा. पर यदि इन पांच सालों मे से किसी एक वर्ष मे यह रिटर्न 44AD को छोडकर रेगुलर स्कीम मे भरा जाये तो आने वाले पांच वर्ष तक वह 44AD का रिटर्न नही भर पायेगा उस स्कीम से बहार हो जायेगा.

उदाहरण के लिये – उपरोक्त दिये गये उदाहरण के अनुसार यदि हम समझे तो दो कंडीशन बन रही है –

पहली कंडीशन, यदि प्रियंका ट्रेडर्स आगामी वर्ष(Assessment Year)2013-14 से अपने रिटर्न नॉन-मेंटेनेंस(44AD) मे भर रही है तो, आने वाले पांच आगामी वर्ष 2017-18 तक यह रिटर्न नॉन-मेंटेनेंस(44AD) मे भरे जायेंगे.

दूसरी कंडीशन, यदि प्रियंका ट्रेडर्स आगामी वर्ष 2013-14 से अपने रिटर्न नॉन-मेंटेनेंस(44AD) मे भर रही है लेकिन, आगामी वर्ष 2015-16 (तीसरे वर्ष) मे यह रिटर्न 44AD को छोडकर रेगुलर स्कीम मे भरा है तो आने वाले पांच आगामी वर्ष 2019-2020    तक वह 44AD का रिटर्न नही भर पायेगा उस स्कीम से बहार हो जायेगा.  

  • इस स्कीम मे व्यक्ति अपनी अनुमानित आय जोकि, सेल/टर्नओवर का आठ प्रतिशत टैक्स भरेगा. पर यदि प्राप्तियां चैक के माध्यम से अन्य कोई बैंक के आधुनिक तरीकों से हो रही है उस केस मे टर्नओवर का छ: प्रतिशत तक टैक्स भरना होता है.

सेक्शन 44ADA के अंतर्गत योग्यता (Eligibility of Section 44ADA) –

  • प्रोफेशनलस् पर्सन (डॉक्टरर्स, चार्टर अकाउंटेंट)
  • लीगल
  • आर्किटेक्ट
  • प्रोफेशनल ऑफ अकाउंटेंसी
  • टेक्नीकल कंसल्टेंट्
  • इंटीरियर डेकोरेटर
  • मेडिकल
  • इंजीनियर

यह सभी लोग इस स्कीम का लाभ ले सकते है.

सेक्शन 44ADA की नियम तथा शर्ते (Terms and Conditions of Section 44ADA) –

इस रिटर्न की लिमिट पचास लाख तक की है अर्थात व्यक्ति या फर्म की ग्रोस रिसिप्ट या वार्षिक टर्नओवर पचास लाख से ज्यादा का नही होना चाहिये. इन लोगों को अपनी टोटल इनकम का पचास प्रतिशत ऑफर करना पड़ेगा खर्चो को छोड़ कर.

उदाहरण के लिये – आदित्य शर्मा जों एक डॉक्टर है जिसका वित्तीय वर्ष 2017-18  मे टोटल टर्नओवर छत्तीस लाख रूपये है (जोकि, वार्षिक टर्नओवर पचास लाख से कम है) यहाँ व्यक्ति ने मान लिया है कि उसे छत्तीस लाख रूपये पर टैक्स भरना है तो यह रिटर्न 44ADA मे भरा जायेगा जिससे वह व्यक्ति बुक्स ऑफ अकाउंट्स मेंटेन करने की जरुरत नहीं है.

सेक्शन 44AE के अंतर्गत योग्यता (Eligibility of Section 44AE)– इसमे विशेष रूप से ट्रांसपोर्टर्स को कवर किया है. जिसमे हर तरीके के ट्रांसपोर्टर्स जैसे- इंडिविजुअल, एचयूएफ,पार्टनरशीप फर्म सभी आजाते है. पर इनके लिये भी सरकार ने कुछ नियम बनाये है उस नियम मे आने वालो को ही इस स्कीम का लाभ मिलेगा बाकि को नही.   

सेक्शन 44AE की नियम तथा शर्ते (Terms and Conditions of Section 44AE) –

इस स्कीम का लाभ कोई भी ट्रांसपोर्टर तभी ले सकते है जब –

  • ट्रांसपोर्टर के पास कम से कम दस ट्रक/ गुड्स विकल होना चाहिये एक साल मे उससे ज्यादा नही. जिसमे 7500/- की दर से हर महीने हर वाहन आय की गणना होगी.
  • हल्के माल वाहन के केस मे, बारह हजार किलोग्राम से कम तथा 7500/- रूपये पर मन्थ की दर से गणना होगी.
  • भारी वाहन के केस मे, बारह हजार किलोग्राम से ज्यादा 1000 पर टन, पर वीकल, पर मन्थ की दर से गणना होगी.
  • इस स्कीम का फायदा जों ओनर है उनको मिलेगी ना की जिसने लीज पर वीकल लिया है.

प्रिज्मटीव टैक्सेशन स्कीम के लाभ (Profit of Presumptive taxation scheme) – इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य ही आयकरदाता के भार को कम करना तथा उन्हें लाभ पहुचना था.

बुक्स ऑफ अकाउंट्स से रिलीफ – व्यापारी को व्यापार करने के साथ अपने खातेबही मे बनाने पड़ते है जिसमे हर एक आय-व्यय का ब्यौरा रखना पड़ता है जोकि व्यापार करने से ज्यादा महंगा पड़ता है इस स्कीम मे जाने के बाद इतनी बारीकी से तथा छोटे व्यापारी को बुक्स ऑफ अकाउंट्स मेंटेन नही करना पड़ता यह वह खुद भी बना कर अपना इनकम टैक्स रिटर्न भर सकता है. 

टैक्स मे लाभ– इस स्कीम मे टैक्स मे काफी लाभ मिलता है अनुमानित आय पर टैक्स निकाल ले तथा यदि टैक्स ज्यादा है तो उसे अडवांस टैक्स के रूप मे भर दे यह भुगतान साल के अंत मे मात्र एक ही किश्त मे होगा. यदि टैक्स कम है तो, रिटर्न के साथ भी भर सकते है.

ऑडिट से छुट– इस स्कीम का सबसे बड़ा लाभ है कि ऑडिट नही कराना होता है. ऑडिट मे हर आय-व्यय तथा सम्पति तथा दायित्व (Assets and Liability) की बारीकी से जाँच नही करानी होती है. किसी चार्टर अकाउंटेंट की भी जरुरत नही होती है.

प्रिज्मटीव टैक्सेशन स्कीम की महत्वपूर्ण बातें(Important Point of Presumptive taxation scheme)

  • यदि किसी असेसी पर टैक्स की लाइबिलिटी आरही है तो उसे उस टैक्स का रुपया अडवांस टैक्स के रूप मे पन्द्रह मार्च तक भरना होगा.
  • 44 AB – इसमें यदि फर्म को प्रोफिट बताया तो उस प्रोफिट मे टर्नओवर का आठ प्रतिशत. इस प्रोफिट मे कोई भी छुट या सेलरी या ब्याज पार्टनर को नही मिलेगी
  • इस स्कीम मे ITR-4 फॉर्म भरना होता है.
  • लेकिन कोई अनिवासी व्यक्ति, कंपनी, संस्था,ट्रस्ट, कमीशन और ब्रोकरेज, एजेंसी व्यवसायी इसका लाभ नही ले सकते.
  • इनकम टैक्स मे कुछ सेक्शन(10A,10AA,10B,10BA, तथा 80HH, 80RRB)दी गई है जिसके अंतर्गत यदि व्यक्ति लाभ ले रहा है तो वह इस स्कीम मे नहीं आयेगा.

प्रिज्मटीव टैक्सेशन स्कीम , सरकार की ऐसी स्कीम है जों कम पैसों मे अधिक लाभ प्राप्त करने वाली होती है. जिसका फायदा हर कोई ले सकता है.

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